Diwali Ka Mahatva Kya Hai

0
Advertisements

यहां पर हम जानेंगे कि 2021 में Diwali Ka Mahatva Kya Hai क्योंकि दिवाली का इतिहास सदियों पुराना है धनतेरस से शुरू होने वाला ये त्यौहार भैया दूज तक चलता है इस त्यौहार को सिर्फ भारतीय ही नहीं बल्कि दुनिया में और भी अनेक देश धूमधाम से मनाते हैं।

दिवाली त्योहार का काफी महत्व माना जाता है एवं ये सदियों पुराना त्यौहार है इसी दिन प्रभु श्री राम अयोध्या वापस लौटे थे और इसकी खुशी में अयोध्या से लेकर पूरा देश दीप जलाकर एवं Diwali Gifts और मिठाईयां बांटकर खुशियां बनाया था।

कहा जाता है कि जिस दिन प्रभु श्री राम अयोध्या वापस आए थे उसी दिन को हर साल दीपावली के रूप में दीप जलाकर मनाया जाता है।

Read More  बेस्ट कंप्यूटर कोर्स फॉर जॉब? नौकरी के लिए कौन सा कंप्यूटर कोर्स करना चाहिए?

दीपावली के ही दिन पांडवों ने भी अपना वनवास एवं अज्ञातवास को पूरा करने के बाद वापस लौटे थे एवं मां दुर्गा ने भी इसी दिन काली का रूप लिया था, और इसी दिन भगवान महावीर को भी मोक्ष की प्राप्ति हुई थी।

Read More

Diwali Ka Mahatva Kya Hai In Hindi

diwali ka mahatva kya hai in hindi
diwali ka mahatva kya hai in hindi

दीपावली के दिन माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है क्योंकि वो इसी दिन क्षिर सागर से प्रकट हुई थी, इस दिन लोग अपने घरों की साफ-सफाई एवं सजावट करते हैं और मां लक्ष्मी की पूजा विधि विधान के साथ करते हैं।

श्री राम के लौटने की खुशी में मनाई गई थी दीवाली

त्रेता युग में कार्तिक महीने की अमावस्या के ही दिन श्री राम माता सीता एवं लक्ष्मण के अयोध्या में वापसी हुई थी और इसी के खुशी में पूरे अयोध्या वासी के साथ ही पूरा देश दीप जलाकर एवं मिठाइयां बांटकर खुशियां बनाए थे।

श्री राम माता सिता एवं लक्ष्मण के अयोध्या आने की खुशी में सभी लोग उत्सव मनाए एवं तभी से हर साल इसी दिन को दिवाली का त्यौहार मनाने का रिवाज चला आ रहा है।

Diwali Ka Mahatva Kya Hai गोवर्धन पूजा

मान्यता के अनुसार गोवर्धन पूजा भगवान श्री कृष्ण एवं भगवान इंद्र से जुड़ी हुई है क्योंकि भगवान श्री कृष्ण ने इंद्र के जगह पर गोवर्धन पर्वत की पूजा करवाए थे और इसके वजह से भगवान इंद्र नाराज हो गए फिर उन्होंने इतना बारिश करवाई की चारों तरफ तबाही आ गई।

यह देखकर भगवान कृष्ण ने गोकुल वासियों को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठा लिया था और तभी से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में गोवर्धन जी की पूजा की जाती है।

भाई दूज त्यौहार का परंपरा

मान्यता के अनुसार भाई दूज त्यौहार का परंपरा मां यमुना एवं यमराज से जुड़ी हुई है, कई बार मां यमुना अपने भाई यमराज से घर पर आकर भोजन करने की निवेदन किया करती थी लेकिन यमराज नहीं आ पाए थे।

एक बार कार्तिक शुक्ल पक्ष के द्वितीय को यमराज मां यमुना के घर पहुंचे तो उन्होंने यमराज से ये वचन ले लिया कि आप हर साल इसी दिन मेरे घर भोजन करने आया करेंगे, और उसी दिन से भाई दूज त्यौहार मनाने का प्रथा चला आ रहा है।

नचिकेता को मिला यमराज से ज्ञान

कठोपनिषद के अनुसार उद्दाल ऋषि जो नचिकेता के पिता थे उन्होंने यमराज से दान करने की बात कहीं, पिता के आज्ञा अनुसार नचिकेता कार्तिक महीने के अमावस्या को यमलोक के लिए निकल पड़े।

लेकिन वहां उनको यमराज नहीं मिले, नचिकेता काफी समय तक प्रतीक्षा करते रहे इस बात को देखकर यमराज बहुत खुश हुए और उन्होंने नचिकेता से तीन वर मांगने के लिए बोला।

नचिकेता ने पहला वर में उनसे अपने पिता का स्नेह मांगा और दूसरा वर अग्नि की विद्या मांगी फिर तीसरा वर मृत्यु के रहस्य का ज्ञान मांगा। और इस तरह से नचिकेता को यमराज के द्वारा ये तीन वर मिलें।

मां दुर्गा ने महाकाली का रूप लिया

दीपावली के ही दिन मां दुर्गा महाकाली का रूप में आ गई थी और उन्होंने असुरों का विनाश करना शुरू किया। असुरो के विनाश करते-करते वे देवो का भी विनाश करने लगीं ये देखकर शिवजी उन्हें रोकने के लिए उनके आगे लेट गएं।

जब शिवजी उनके रास्ते में लेटे हुए थे और मां दुर्गा के पांव उनके छाती पर पड़ा तो ये देखकर मां दुर्गा के क्रोध अचानक ही शांत हो गए थे और तभी से दीपावली के ही दिन काली पूजन का भी विधान है।

दीपावली से जुड़ा छठ पूजा

अब हम Diwali Ka Mahatva Kya Hai में chhth Puja की भी बात करेंगे क्योंकि छठ पूजा भी दीपावली त्यौहार से ही जुड़ा हुआ है क्योंकि जब भगवान श्री राम और माता सीता रावण के वध करने के बाद कार्तिक शुक्ल की षष्ठी तक उपवास रखे थे एवं सूर्य देव की आराधना की थी।

और कार्तिक शुक्ल के ही सप्तमी को उगते हुए सूर्य की पूजा करके आशीर्वाद लिए थे तभी से छठ पूजा का त्यौहार मनाने का रिवाज चला आ रहा है।

दिवाली के ही दिन लौटे थे पांडव

महाभारत कथा के अनुसार पांचो पांडव द्वित में अपना सब कुछ हारने के बाद बाहर वर्ष का वनवास और एक वर्ष के लिए अज्ञातवास को चले गए थे।

जब उन्होंने अपना बारह वर्ष का वनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास पूरा करके वापस लौटें तो वो दिन दीपावली का ही दिन था।

दीपावली के ही दिन संतो को मिला था निर्वाण

मान्यता के अनुसार महान संत स्वामी दयानंद सरस्वती को दीपावली त्यौहार के ही दिन निर्वाण मिला था वेदों के प्रकांड ज्ञाता स्वामी रामतीर्थ ने भी दीपावली त्यौहार के दिन ही अपना देह का त्याग किए थे।

दीपावली त्यौहार पर सूप बजाने का रिवाज

दीपावली त्यौहार में भारत के कई राज्यों में सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सूप बजाने की प्रथा है। मातायें इस दिन भोर में उठकर सुप बजाती हैं एवं मां लक्ष्मी का पूजा प्रार्थना करती है।

कई राज्यों में अरंजी के लकड़ियों का हुक्का बनाकर फिर इसे जला के पूरे घर में घुमाया जाता है और फिर बुझाने के बाद इसे छत पर फेंक दिया जाता है। मान्यता के अनुसार ऐसा करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है।

इस त्योहार पर कई राज्यों में नई झाड़ू खरीद के मंदिरों में दान करने का भी रिवाज है त्यौहार एक ही होता है लेकिन अलग अलग राज्य में अपने-अपने विधि विधान के अनुसार मनाया जाता है।

Diwali Me Rangoli Ka Mahatva

भारत में दिवाली के त्यौहार के मौके पर घर के मुख्य दरवाजे पर रंगोली बनाने का परंपरा चली आ रही है। कहा जाता है कि मां लक्ष्मी जी के स्वागत के लिए ही Rangoli बनाई जाती है।

रंगोली के लिए विशेष प्रकार के कलाकृति एवं कई तरह के रंगों का उपयोग किया जाता है एवं रंगोली बनने के बाद ये एक यंत्र की तरह दिखती है।

रंगोली बनाते समय इसमें स्वास्तिक, कमल का फूल एवं मां लक्ष्मी जी के पद चिन्ह डाला जाता है। दिवाली के मौके पर रंगोली बनाने से समृद्धि एवं मंगलकामना का फल मिलता है एवं यह सभी तरह के नकारात्मक ऊर्जा को दूर भगाती है।

घर के मुख्य द्वार एवं माता लक्ष्मी के मूर्ति के पास एक गोलाकार रंगोली बनाकर इस के बीचो बीच एक दीपक स्थापित किया जाता है। रंगोली में पीले रंग का उपयोग होता है एवं इसमे काले रंग का निषेध किया जाता है।

मुख्य द्वार पर बना हुआ रंगोली के दोनों तरफ दीपक रखना चाहिए इससे रंगोली जागृत होता है एवं ऐसे में धन-धान्य के बढ़ने की संभावना होती है।

विदेशों में दिवाली

दीपावली का त्यौहार सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में भी धूमधाम से मनाया जाता है, इंडोनेशिया और सिंगापुर में भारत के ही तरह घरों में लाइटों की सजावट की जाती है और मिठाइयां बांट के इस त्यौहार को मनाया जाता है।

मलेशिया और मॉरीशस में हिंदू धर्म से संबंधित लोगों की संख्या ज्यादा होने के कारण वहां पर इस त्यौहार के मौके पर नौकरियों में अवकाश होता है। मलेशिया में इस त्यौहार को हरि दिवाली के नाम से जाना जाता है।

श्रीलंका में भी दीपावली का त्यौहार बड़े त्योहारों में शामिल है एवं नेपाल में भी इस त्यौहार को तिहार के नाम से मनाते हैं एवं भारत के ही तरह घरों को सजा के मिठाइयां बांट के दीपावली मनाया जाता है।

और अंत में

तो आज के इस पोस्ट में हमने दिवाली का महत्व हिंदी में को जाना इसके इतिहास के बारे में भी जाना एवं अलग-अलग जगहों पर मनाने की अलग-अलग रिवाज को भी जाना।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here